
रतलाम । टी स्टेट न्यूज धर्मराज डाबला । गाँवो में आज भी महिलाएं गाज बीज और भील भीलनी ओर उनके परिवार की पूजा (मोटी रोटी ) गजाकडा ओर खीर का भोग लगाकर करते हैं और भादों महीने में गिरने वाली आकाशीय बिजली से कोई जनहानी नहीं हो इसके लिए प्रार्थना करती है । मान्यता है कि गाज माता निसंतान को संतान देती हैं और सच्चे मन से व्रत करने वालों के घर-परिवार को भरा-पूरा रखती हैं ओर जिसके बाद आकाशीय बिजली गिरने से कोई जन धन हानि नही हो ।
(1) ज्योतिषचार्य गोविंद लाल जोशी ने बताया कि मान्यता है कि एक बार भादों के महीने में तेज गर्जना के साथ गाज माता (गरज चमक के साथ बिजली गिरना) का प्रकोप हुआ उस समय राजा नल और रानी को ब्राह्मण के द्वारा गाज बीज के महत्व को बताते हुए व्रत करने की बात कही और रानी से गाज लेने के लिए कहा रानी ने पूछा कि ये पूजा कैसे की जाती है। ब्राह्मण ने बताया कि सवा शेर आटे के दो गाज रोटा (मोटी रोटी या गजाकडा ) बनाए जाते हैं इस पर रानी अहंकार में आ गईं और बोलीं कि सवा पान का बीड़ा तो मुझसे खाया नहीं जाता, तो सवा शेर का गजाकडा (रोटा) कौन खाएगा रानी की ऐसी घमंड भरी बात के बाद राजा नल के जीवन में गरीबी और बुरे दिन आ गए। उनका सारा वैभव छिन गया , अपनी गलती का अहसास होने और बुरे दिनों से मुक्ति पाने के लिए राजा नल और रानी को अपनी भूल का पछतावा हुआ। इसके बाद उन्होंने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ गाज माता का व्रत किया और माता की पूजा की। गाज माता ने उनकी पूजा से प्रसन्न होकर उनकी सारी विपदाएँ दूर कर दीं। राजा नल का खोया हुआ राजपाट, अन्न और धन का भंडार वापस मिल गया।
(2) एक समय की बात है, एक राजा और रानी की कोई संतान नहीं थी, जिसके कारण वे बहुत दुखी रहते थे। रानी हमेशा गाज माता की भक्ति और व्रत किया करती थी। एक दिन भारी बरसात और बादलों की गड़गड़ाहट के बीच रानी ने प्रार्थना की यदि उसके नौ महीने में संतान हो गई, तो वह पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करेगी कुछ समय बाद रानी को पुत्र की प्राप्ति हुई। लेकिन संतान सुख मिलने पर रानी माता से की गई अपनी मन्नत भूल गई। इससे गाज माता नाराज हो गईं। तो रानी का बेटा पालने में सो रहा था, तब भयंकर गरज-चमक के साथ बिजली आई और पालने से सोते हुए बच्चे को उठाकर ले गई ओर एक भील भीलनी को वो बच्चा दे दिया ,
जब रानी को अपनी भूल का अहसास हुआ और बेटा गायब मिला, बहुत पश्चाताप हुआ। रानी रोते हुए गाज माता और भील भीलनी से प्रार्थना करने लगी कि उसका बेटा लौटा दे, और धूमधाम से व्रत कर उद्यापन करेगी। रानी की पुकार सुनकर गाज माता ने दया की और उसका बेटा उसे भीलनी से लेकर वापस लौटा दिया। और दूसरी ओर एक गाँव में भीलनी के यहाँ भी माता ने धन-दौलत और सुख-समृद्धि की कृपा की। इसके बाद राजा ने पूरे राज्य में ढिंढोरा पिटवा दिया कि संतान सुख या शुभ कार्यों पर सभी को गाज माता का व्रत और उद्यापन करना चाहिए।


